ट्रांसफर मार्केट अपने शबाब पर है और तमाम उलझे ट्रांसफर्स प्लेयर्स के बीच आर्सनल के एलेक्सिस सांचेज का नाम काफी चर्चा में है। आर्सनल के इस दमदार फॉरवर्ड को लगातार कई टीमों से लिंक किया जा रहा है। बार्सिलोना से आर्सनल आने के बाद सांचेज ने अपने प्रदर्शन से खुद को लीग के बेस्ट प्लेयर्स में से एक बना लिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सांचेज ने अपनी शुरूआत काफी कठिन परिस्थितियों में की थी...


सांचेज का जन्म चिली की टोकोपिला नामक जगह पर हुआ था। यह जगह चिली के सबसे पिछड़े इलाकों मे से एक है। सांचेज को उनके पिता ने तभी छोड़ दिया था जब वह छोटे बच्चे थे। सांचेज जब बड़े हो रहे थे तो उनके पास कुछ नही था। उन्हे हर चीज के लिए लड़ना था, मेहनत करनी थी।

Chilean footballers Alexis Sanchez (L) a

उनका परिवार काफी गरीब था।सांचेज ने 6 साल की उम्र से ही पैसे कमाने शुरू कर दिए थे। वह कभी लोगों की गाड़ियां धुलते थे तो कभी बीच सड़क पर कलाबाजी दिखाने लगते थे इसके बदले उनको कुछ पैसे मिल जाते थे।


सांचेज शुरू से ही एक छोटे जिमनास्ट की तरह थे और लोगो को एंटरटेन करते रहते थे। सांचेज के पड़ोसी उनको अपने एंटरटेनमेंट के बदले मे कुछ पैसे दे दिया करते थे। कभी-2 तो ऐसा समय भी आ जाता था कि भूख से बिलबिलाता छोटा सांचेज पड़ोसियों के दरवाजे पर रोटी मांगता था।


सांचेज एक छोटे से एकमंजिला घर मे अपने 4 भाई-बहनो और अपनी मां के साथ बड़े हो रहे थे। उनकी मां ने उनको पालने मे काफी संघर्ष किया। उन्होंने पैसे कमाने के लिए हर छोटा बड़ा काम किया। उन्होने अपने पड़ोसियों की मछलियां धोईं तो कभी फूल बेचकर कुछ पैसे का इंतजाम किया।

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सांचेज जहां रहते थे वहां उनके पास जीने के लिए सिर्फ तीन ऑप्शन थे- मछली पकड़ना, कोयले की खदान मे काम करना या फुटबॉलर बनना। वैसे सांचेज तो शुरू से ही फुटबॉलर बनना चाहते थे लेकिन उनकी गरीबी उनके सामने आ जाती थी। लेकिन सांचेज ने हिमम्त नही हारी और वो नंगे पैर ही कीचड़ वाली फील्ड मे खेलने निकल जाते थे।


उनकी गरीबी ने ही मैदान पर उनको प्रेरित किया. एक बच्चे के तौर पर सांचेज के पास अदभुत एनर्जी थी और इसी वजह से उनका नाम 'वंडर किड' पड़ा था। सांचेज की मेहनत उस समय रंग लाई जब उन्हे अराउको क्लब के यूथ टीम के कोच अल्बर्टो टोलेडो ने देखा और अपनी टीम मे ले आए।

Chilean Alexis Sanchez of River Plate ce

हालांकि उस टीम मे खेलने के लिए सांचेज को पैसे नही मिलते थे। एक बार उनकी टीम किसी मैच मे 1-0 से पीछे चल रही थी और सांचेज मैदान पर लेट पहुचे थे लेकिन जैसे ही सांचेज ने मैदान मे कदम रखा उसके बाद उन्होने एक के बाद एक करते हुए 8 गोल दाग दिए।


उसके बाद सांचेज धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। सबसे पहले वह चिली के क्लब कोब्रेलोआ पहुंचे फिर उसके बाद अर्जेंटीना के रिवर प्लेट और उसके बाद वो इटली के उडिनेसे पहुंचे जहां से 2011 मे बार्सिलोना ने उन्हे अपने साथ जोड़ लिया।

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सांचेज स्टार बनने के बाद अपने होमटाउन वापस गए और अपने भाई के साथ वहां के गरीब बच्चों में मिठाईयां और शर्टस बांटे। उन्होने अपने होमटाउन मे छोटे बच्चों के लिए 5 फुटबॉल पिच बनाने के लिए 160,000 पौंड का दान भी दिया था।


छोटे सांचेज ने बचपन मे गंदे और कीचड़ वाली जगहों पर फुटबॉल खेला था लेकिन आज वही सांचेज दुनिया की हर बड़ी टीम के खिलाफ और हर बड़े स्टेडियम में खेल रहा है।


इस साउथ अमेरिकी सितारे की कहानी हमें बताती है कि, 'सपने पूरे होते हैं' बस जरूरत है अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिलोजान से लगे रहने की।