​यह आर्टिकल हमारी फुटबॉल फार्मेशन सीरीज का दूसरा पार्ट है, जहां हम नज़र डालेंगे 4-3-3 फार्मेशन पर...


परिचय 


चेल्सी में अपने पहले स्पेल के दौरान होज़े मोरिन्हो द्वारा इस्तेमाल किया गया 4-3-3 फॉर्मेशन आज भी विश्व के सबसे बड़े क्लबों के बीच काफी पॉपुलर है| 4-3-3 को सेंट्रल मिडफ़ील्ड में कंट्रोल हासिल करने के लिए बनाया गया था, जिससे टीम के पास अटैक के दौरान विविधता आये| यह फॉर्मेशन ऐसी टीमों को लाभ पहुंचता है, जिनके खिलाड़ी बॉल कंट्रोल और पासेज़ देने में माहिर होते हैं| यह एक ऐसा सिस्टम है, जो चतुराई से किये गए बॉल मूवमेंट से गोल स्कोरिंग मौके बनाने पर बल देता है| 


मिडफ़ील्ड के तीन खिलाड़ियों में एक डिफेंसिव मिडफ़ील्डर होता है और अन्य दो मिडफील्डर अटैकिंग होते हैं | फ्रंट के तीन अटैकिंग खिलाड़ियों  में एक लेफ्ट विंगर, एक राइट विंगर और एक स्ट्राइकर होता  हैं| हालांकि दोनों विंगर की कुछ डिफेंस में भी जिम्मेदारियां होती हैं और पजेशन न रहने पर उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है| 

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पॉपुलर फॉर्मेशन 4-2-3-1 इसी फॉर्मेशन का एक अलग रूप है जहां टीमें विंगर्स की जगह सेंट्रल अटैकिंग मिडफील्डर से खेलती हैं, जिन्हे मैदान की चौड़ाई इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता दी जाती है | 


ताकत 


इस फॉर्मेशन की सबसे बड़ी ताकत है मिडफ़ील्ड में कंट्रोल और विंगर्स को मैदान में चढ़कर खेलने की आज़ादी| मिडफ़ील्ड में तीन खिलाड़ी होने से टीम को गेम में अपना कंट्रोल बनाने का अवसर मिलता है और कई बार विरोधी टीम के मिडफ़ील्डर से संख्या में अधिक होने का भी लाभ मिलता है| मॉडर्न फुटबॉल में इस फॉर्मेशन में एक मिडफ़ील्ड खिलाड़ी का प्राथमिक रोल विरोधियों के अटैक को रोक कर अपने डिफेंस की मदद करने का होता है| उनका यह डिफेंसिव रोल इस फॉर्मेशन की नींव है क्योंकि उससे बाकी दोनों सेंट्रल मिडफील्डर को अटैक करने की स्वतंत्रता होती है|


मिडफ़ील्ड में तीन खिलाडी होने से ज्यादातर बॉल पजेशन टीम के पास ही होता है, जिससे दोनों फुल बैक को अटैक करने का लाइसेंस मिल जाता है| उन्हें पता होता है कि पजेशन खोने पर भी उन्हें काउंटर अटैक के दौरान डिफेंस में वापस आने का मौका मिल जाएगा| 

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फ्रंट के तीन खिलाडियों में दोनों विंगर्स को काफी एडवांस पोजीशन में चढ़ के खेलने का मौका मिलता है, जिसकी वजह से विरोधी फुल बैक खिलाड़ियों का अटैकिंग पोजीशन में जाना काफी रिस्की हो जाता है और उनका अटैकिंग ऑप्शन सीमित हो जाता है| विंगर्स के एडवांस पोजीशन में होने से काउंटर अटैक करना भी काफी आसान हो जाता है और ऐसे कई मौके आते हैं जब काउंटर अटैक में खिलाड़ियों की संख्या विरोधी टीम के खिलाड़ियों की संख्या से अधिक हो जाती है|                                                                                                                               


कमज़ोरी 


4-3-3 को सफलता से लागू करने के लिए ऐसे खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है जिनमे अपनी पोजीशन और पास डिस्ट्रीब्यूशन की अच्छी समझ होती है| विंगर्स के मैदान में चढ़कर खेलने से विरोधियों के अटैकिंग खिलाड़ियों के खिलाफ फुलबैक्स हमेशा अकेले पड़ जाते हैं, उनकी मदद करने और मैदान के वाइड एरिया से अटैक रोकने के लिए दोनों सेंट्रल अटैकिंग मिडफील्डर में से किसी एक को अपनी पोजीशन छोड़कर डिफेंस की मदद करने जाना पड़ता है, जिससे टीम का शेप बिगड़ जाता है| 


इस फॉर्मेशन की एक और दिक्कत फुल-बैक के अटैकिंग पोजीशन पर जाने से आती है, जिसके वजह से डिफेंस को कवर करने के लिए सिर्फ दो सेंटर बैक और डिफेंसिव मिडफील्डर रह जाते हैं | ऐसे गेम जहां पर विरोधी टीम का पजेशन में दबदबा होता है, यह फॉर्मेशन अटैक माइंडेड होने के कारण काफी रिस्की हो जाता है | 


4-3-3 को सही तरीके से लागू करने वाली टीमें 


रोमा, बार्सिलोना, सेल्टा विगो, चेल्सी (2004-2006 होज़े मोरिन्हो के पहले कार्यकाल में ), अयैक्स (1970 दशक में)

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खिलाड़ियों की भूमिका 


फुलबैक्स 


इस फॉर्मेशन में फुलबैक्स का अटैकिंग और डिफेंसिव दोनों सेंस में एक महत्वपूर्ण रोल होता है| विंगर्स के द्वारा डिफेंस में काफी कम सपोर्ट आने से फुलबैक्स को ज्यादातर विरोधियो के अटैक का सामना अकेले करना होता है, जिसके लिए उनकी डिफेंस करने की काबिलियत शानदार होने की दरकार होती है| फुलबैक्स को यह भी समझना होता है कि कब उन्हें अटैक में आगे जाना है और कब अपनी पोजीशन को होल्ड करना है| 


डिफेंसिव मिडफील्डर 


डिफेंसिव मिडफील्डर 4-3-3 की नींव होता है, जिसका प्राथमिक रोल विरोधियों से पजेशन जीतकर अटैक को स्टार्ट करने का होता है| डिफेंसिव मिडफील्डर को मैदान के डिफेंस और मिडफील्ड के बीच के स्पेस को कवर करना होता है, उसे काफी बार अपने फुलबैक्स के अटैक पोजीशन पर जाने के लिए भी कवर करना पड़ता है| मॉडर्न फुटबॉल में डिफेंसिव मिडफील्डर को मैदान के डीप पोजीशन से अटैक की शुरुआत करने की भी ज़िम्मेदारी दी जाती है| 

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बॉक्स टू बॉक्स मिडफील्डर 


बॉक्स टू बॉक्स मिडफील्डर की जिम्मेदारी पूरा मैदान कवर करने की होती है| उसे अपनी टीम के लिए गोल दागने, साथी खिलाड़ियों के लिए मौका बनाने के साथ साथ डिफेंस में भी मदद करनी होती है| बॉक्स टू बॉक्स मिडफील्डर को काफी दौड़ लगानी होती है, जिसके लिए उनकी फिटनेस का बढ़िया होना बेहद अहम हो जाता है| 


प्लेमेकर और स्ट्राइकर


मिडफ़ील्ड में खेलने वाला तीसरा खिलाड़ी प्लेमेकर होता है जिसकी जिम्मेदारी अपने सामने के तीन अटैकिंग फॉरवर्ड्स के लिए मौके बनाने की होती है| प्लेमेकर को कभी कभी नंबर 10 की भी पोजीशन लेनी पड़ती है और उनके ऊपर विरोधी टीम के डिफेंस को भेदने के लिए पेनिट्रेटिव पास देने की जिम्मेदारी होती है|

 

स्ट्राइकर को बॉल पजेशन जीतने में मदद करना होता है और बॉल होल्ड अप कर वाइड पोजीशन में खेल रहे साथी खिलाड़यों को गेम में लाने की जिम्मेदारी होती है|

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निष्कर्ष 


यह फॉर्मेशन ऐसी टीमों को सूट करता है जिन्हे अटैकिंग फुटबॉल खेलना पसंद हो| विंगर्स के मैदान में चढ़कर खेलने से, फुल बैक के बार बार ओवरलैपिंग रन लगाने से और दो अटैक माइंडेड मिडफ़ील्डरों के होने से यह फार्मेशन अटैक करने के लिए आदर्श है| लेकिन विरोधी टीम के फेवरिट्स होने पर इस फॉर्मेशन को अपनाना थोड़ा रिस्की ज़रूर होता है|