​FT: फ्रांस (म्बाप्पे 14', जिरू 75') 2-1 नीदरलैंड्स (बेबल 67')


ओलिविए जिरू के सेकंड-हाफ गोल की मदद से फ्रांस ने बीती रात स्टैड डे फ्रांस में खेले गए UEFA नेशंस लीग के मुकाबले में नीदरलैंड्स को 2-1 से परास्त किया।


1. तीन महत्वपूर्ण पॉइंट्स हासिल करने में सफल रहे वर्ल्ड कप विनर्स 

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किलियन म्बाप्पे और ओलिविए जिरू के गोल्स की मदद से फ्रांस ने नेशंस लीग के ग्रुप A के मुकाबले में नीदरलैंड्स को मात देकर तीन महत्वपूर्ण पॉइंट्स हासिल किए। PSG टीनेजर म्बाप्पे एक बार फिर टीम के स्टार रहे और स्टैड डे फ्रांस में खेले गए मुकाबले के ओपनिंग हाफ में उन्होंने अपनी पेस, मूवमेंट और ट्रिक्स से काफी प्रभावित किया।


गेम के 14वें मिनट में म्बाप्पे ने टीम को बढ़त भी दिलाई जब डच प्लेयर क्विंसी प्रॉमिस ने बॉल सीधा ब्लेज़ मतुईडी की ओर हेड की और युवे मिडफील्डर के कट-बैक पर म्बाप्पे ने बॉल को नेट में डालने में कोई गलती नहीं की। लेकिन गेम में पजेशन डॉमिनेट करने के बावजूद फ्रांस को दूसरे हाफ में स्ट्रगल करना पड़ा और रोनल्ड कुमन की टीम ने ऑवर-मार्क के बाद रयान बेबल की मदद से बराबरी की।


हालांकि वर्ल्ड कप में एक भी गोल दागने में असफल रहे चेल्सी स्ट्राइकर ओलिविए जिरू ने जल्द ही बेंजामिन मेंडी के क्रॉस पर अपनी वॉली से गोल दागकर फ्रांस को बढ़त दिलाई जो अंत में मैच का विनिंग गोल साबित हुआ और फ्रांस ने तीन अहम पॉइंट्स हासिल करने में कामयाबी पाई।


2. जिरू ने किया अपने गोल के सूखे का अंत 

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चेल्सी के सेंटर-फॉरवर्ड ओलिविए जिरू लेस ब्लूज़ के बैलेंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन गोल के सामने वह पिछले कुछ समय से बुरी तरह विफल रहे हैं। हालांकि नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच विनिंग गोल दागकर उन्होंने पिछले 11 मैचों से चले आ रहे अपने गोल के सूखे का अंत शानदार अंदाज़ में किया और दिदिएर देशाम्प की साइड को महत्वपूर्ण जीत दिलाई।


जिरू का यह फ्रेंच शर्ट में 32वां गोल था और अब फ्रांस के टॉप गोस्कोरर्स की लिस्ट में वह चौथे नंबर पर पहुंच चुके हैं। अपने लिंक-अप प्ले, एरियल गेम और डिफेंसिव वर्क-रेट के लिए मशहूर जिरू रूस 2018 में एक भी शॉट टार्गेट में रखने में नाकाम रहे थे लेकिन बावजूद इसके वह टीम के महत्वपूर्ण सदस्य थे।


हालांकि अब स्कोरशीट में आकर स्ट्राइकर खुश होंगे और अपने फॉर्म को आगे के मुकाबलों में भी जारी रखने की कोशिश करेंगे। जर्मनी से अपने पहले मुकाबले में 0-0 का ड्रॉ खेलने के बाद फ्रांस के लिए जीत दर्ज करना जरूरी था और जिरू ने अपनी शानदार फिनिश से टीम की नैया पार लगाई।


3. काम आई देशाम्प की टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी 

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फ्रांस ने इस कड़े मुकाबले में एक बार फिर दिखाया कि वे वर्ल्ड चैंपियंस क्यों हैं। रूस 2018 में उनके रन को कई टीमों ने डिफेंसिव बताया था लेकिन देशाम्प की यह टैक्टिस काफी इफेक्टिव थी और लेस ब्लूज़ ने टूर्नामेंट की सभी बड़ी टीमों को परास्त कर ख़िताब जीता था।


नीदरलैंड्स के खिलाफ ओपनिंग पीरियड डॉमिनेट करने के बाद फ्रांस को बड़ी बढ़त बनानी चाहिए थी लेकिन कुछ अच्छे मौके गंवाने के बाद उन्होंने नीदरलैंड्स को मैच में वापसी करने का मौका दिया। हालांकि देशाम्प ने स्क्वॉड की टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी का इस्तेमाल कर अपने ऑप्शंस में डेप्थ दिखाई और बेंजामिन मेंडी को मैदान में भेजा जिन्होंने जिरू के गोल में असिस्ट दिया।


मैच में दोबारा बढ़त लेने के बाद देशाम्प ने स्टीवन एनजोन्ज़ी को मैदान में भेजकर गेम को क्लोज़ किया। फ्रांस ने पहले हाफ में दिखाया कि उनमें पजेशन डॉमिनेट कर मौके बनाने की काबिलियत है, वहीं दूसरे हाफ में उन्होंने प्रैग्मैटिक अप्रोच अपनाकर नीदरलैंड्स पर लगाम लगाई और सही सब्टीट्यूशंस एवं टैक्टिकल स्विच से जीत दर्ज करने में कामयाबी पाई।