FT: जर्मनी 0-0 फ्रांस


UEFA नेशंस लीग के ओपनिंग वीक में म्यूनिख के अलियांज अरेना में खेले गए अहम मुकाबले में जर्मनी और वर्ल्ड चैंपियन फ्रांस ने 0-0 का गोलरहित ड्रॉ खेला।


1. नेशंस लीग की उदासीन शुरुआत 

Germany v France - UEFA Nations League A

UEFA ने नेशंस लीग कम्पटीशन की शुरुआत इंटरनेशनल मुकाबलों में रोमांच लाने के लिए की थी लेकिन म्यूनिख की भारी वर्षा में फ्रांस और जर्मनी ने गोलरहित ड्रॉ खेला। कागज़ पर यह नए इनिशिएटिव की शुरूआत करने का शानदार तरीका था और नए वर्ल्ड चैंपियंस के सामने ग्रुप स्टेज में बाहर होने वाली जर्मनी की चुनौती थी। किलियन म्बाप्पे, एंटोइन ग्रीज़मान, पॉल पोग्बा, थॉमस मुलर और टोनी क्रूस जैसे स्टार्स भी मैदान पर थे।


लेकिन गेम का अंत 0-0 के ड्रॉ के साथ हुआ जहां दोनों टीमों के प्लेयर्स ने सेट पीस में हाई-फाइव किया और बॉल के बाहर जाने पर एक-दूसरे के साथ मज़ाक करते नज़र आए। इसे एक कम्पटीटिव मुकाबला होना था लेकिन ऐसा महसूस नहीं हुआ। वर्ल्ड कप के महज दो महीने वाद सभी खिलाड़ी अपनी मैच फिटनेस हासिल करने की कोशिश में हैं और क्लब फुटबॉल को तरजीह देने के चलते नेशंस लीग के मुकाबले में इंटेंसिटी की कमी नज़र आई।


2. पोग्बा नहीं म्बाप्पे हैं फ्रांस के असली स्टार 

FBL-NATIONS-GER-FRA

वर्ल्ड कप में फ्रांस के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले किलियन म्बाप्पे स्टार बन चुके हैं और म्यूनिख में एक बार फिर उन्होंने अपनी क्लास दिखाई। PSG फॉरवर्ड बॉल के साथ बिजली की तरह तेज़ दिखे और पजेशन ना होने पर उनकी मूवमेंट लाज़वाब थी। टीम के अन्य स्टार्स की तुलना में म्बाप्पे एक अलग ही लेवल पर दिखे।


फ्रांस की टीम मिडफ़ील्ड में एनगोलो कांटे, अटैक में एंटोइन ग्रीज़मन और डिफेंस में सैमुएल उमतिति और रफाएल वरान पर निर्भर करती है। लेकिन पॉल पोग्बा का क्या? मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्लेयर मुकाबले में बेहद फीके नज़र आए और उन्होंने कई दफा पजेशन गंवाया जिससे देशाम्प क्रोधित हुए। 25 साल के मिडफील्डर कांटे के साथ डीप रोल में कम्फर्टेबल नज़र नहीं आए और ऐसा बिलकुल भी नहीं लगा कि फ्रांस को उनकी जरूरत है।


3. लूव के सामने बड़ी है चुनौती 

Germany v France - UEFA Nations League A

जेरोम बोआटेंग का वर्ल्ड कप में प्रदर्शन बुरा था लेकिन उनके इंटरनेशनल करियर का अंत नहीं हुआ। मेसुत ओज़िल ने संन्यास की घोषण की वहीं सैमी खेदिरा और योनस हेक्टर जैसे प्लेयर्स भी नेशनल टीम से दूर गए। योआखिम लूव ने एक बार फिर उन खिलाड़ियों से लॉयल्टी दिखाई जिन्होंने जर्मनी को रूस में शर्मसार किया था।


अगर लूव यूरो 2020 की प्लानिंग कर रहे हैं तो लिओन गोरेत्ज्का ही एकमात्र प्लेयर हैं जिन्हें भविष्य का सितारा कहा जा सकता है। लूव ने लेरॉय साने को बेंच पर रखा और बोआटेंग, नोएर, क्रूस, हमल्स, मुलर और रोएस जैसे सितारों पर भरोसा दिखाया।


फ्रांस जहां एनर्जी से भरपूर दिख रही थी वहीं जर्मन्स थोड़े सुस्त नज़र आए। हालांकि दूसरे-हाफ के अंत में उन्होंने  फ्रेंच गोलकीपर अल्फोंस अरेओला को जरूर टेस्ट किया। जर्मनी के पास कई शानदार टैलेंट्स हैं लेकिन उनके पास ऐसे भूखे युवा खिलाड़ियों की कमी है जो मौजूदा स्टार्स को उनकी जगह के लिए पुश करें जो लूव के लिए चिंता का विषय है।