प्रीमियर लीग में ​समर ट्रांसफर विंडो को खुलने में महज चार दिन रह गए हैं। वर्ल्ड कप ईयर होने के चलते ट्रांसफर विंडो में इस बार फोकस थोड़ा कम होगा लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि क्लब्स अपनी स्क्वॉड्स को इम्प्रूव नहीं करेंगे। इस समर हमें कुछ बड़ी डील्स देखने मिल सकतीं हैं।


ट्रांसफर मार्केट में हर दिन चीज़ें बदलती हैं और खिलाड़ी के ट्रांसफर के पीछे का बिज़नेस बेहद पेचीदा होता है। 

आइये नज़र डालते हैं खिलाड़ियों के ट्रांसफर के पीछे की पूरी प्रक्रिया पर...


1. स्काउटिंग

FBL-EURO-2016-SUPPORTERS-SECURITY

एक मैनेजर की सफलता के पीछे स्काउट्स का बहुत बड़ा हाथ होता है। स्काउटिंग की प्रोसेस को काफी गंभीरता से लिया जाता है। एक खिलाड़ी की स्काउटिंग करने में कई दिन, महीने, साल लग जाते हैं और खिलाड़ी के खेलने के अंदाज़ को बारीकी से देखा जाता है और तय किया जाता है कि वह क्लब में फिट हो पाएगा या नहीं।


एक खिलाड़ी की स्काउटिंग में सिर्फ उसकी स्किल्स ही नहीं देखी जाती, बल्कि उसका बैकग्रॉउंड, पिच पर एट्टीट्यूड, वार्म अप में बॉडी लैंग्वेज, लीडरशिप और कैरेक्टर जैसी सभी चीज़ें को जज किया जाता है।


सामान्यतः क्लब करीब 10 से 15 स्काउट्स रखते हैं और उनको लीड करने वाला एक हेड- चीफ स्काउट होता है। चीफ स्काउट की मैनेजर के साथ काफी अच्छी रिलेशनशिप होती है और वह मैनेजर के विजन को ध्यान में रखते हुए क्लब के लिए उपयुक्त खिलाड़ी ढूंढता है।


ट्रांसफर एक्टिविटी में स्काउट्स की काफी अहम भूमिका होती है। आजकल खिलाड़ियों की स्काउटिंग उनके स्टैट्स के बेस पर भी होने लगी है, लेकिन इस प्रोसेस में काफी खामियां हैं।


2. प्लेयर्स की इन्क्वायरी 

FBL-FRA-LIGUE1-NICE

स्काउटिंग प्रोसेस पूरी होने के बाद खिलाड़ियों को टार्गेट कर लिया जाता है और उनके मौजूदा क्लब से उनकी अवैबिलिटी को लेकर पूछताछ की जाती है। मॉडर्न डे फुटबॉल में खिलाड़ी और उनके एजेंट को किसी भी क्लब का ऑफर आने से पहले ही उनके इंट्रेस्ट के बारे में पता होता है।


खरीदने वाला क्लब सबसे पहले यह देखता है कि उसके खिलाड़ी को अपने क्लब से जोड़ने के कितने चांसेस हैं। फिर क्लब और एजेंट में बातचीत होती है, जिसमें कुछ सवाल किए जाते हैं - जैसे खिलाड़ी कितनी रकम में जाएंगे, उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने में कितना समय बचा है, खिलाड़ी कितनी सैलरी चाहता है, उसके मौजूदा वेज कितने है, खिलाड़ी की फैमिली और पर्सनल सिचुएशन कैसी है?


फिर किसी भी खिलाड़ी को साइन करने के लिए बाइंग क्लब ई-मेल के जरिये बिड करता है। पहले यह काम फैक्स की मदद से किया जाता था। 99.99 प्रतिशत मौकों पर क्लब ओपनिंग बिड को रिजेक्ट कर देते हैं। फिर बढ़ी हुई रकम के साथ दूसरी बिड की जाती है, जिससे क्लब खिलाड़ी को साइन करने के और करीब आता है। फिर इसी प्रोसेस से दोनों क्लब्स में ट्रांसफर फीस को लेकर अग्रीमेंट बन जाती है।


3. खिलाड़ी से पर्सनल टर्म पर बातचीत

TOPSHOT-FBL-ESP-LIGA-BARCELONA-FRA-LIGUE1-PSG-NEYMAR

बिड के एक्सेप्ट होने के बाद खिलाड़ी का ट्रांसफर पूरा होने के और भी करीब आ जाता है। इसके बाद क्लबों को खिलाड़ी से पर्सनल टर्म पर अग्री करना होता है। मॉडर्न फुटबॉल में पर्सनल टर्म में सिर्फ सैलरी पर ही बात नहीं होती, बल्कि खिलाड़ियों की और भी कई डिमांड होतीं है, जिन पर थोड़ी सी भी डिसअग्रीमेंट से पूरी डील खराब हो सकती है।


पर्सनल टर्म में क्लब का मैनेजर खिलाड़ी से फुटबॉल को लेकर बातचीत करता है और उसे बताता है कि वह उसका इस्तेमाल टीम में कैसे करना चाहते हैं। क्लब के चीफ, डायरेक्टर ऑफ़ फुटबॉल या ऑनर खिलाड़ी की सैलरी और पैसों से जुड़े हुए इशू पर चर्चा करते हैं। जिनमें साइनिंग ऑन फीस, बेसिक वेज पैकेज, जीतने या गोल दागने पर बोनस इत्यादि चीज़ें जुड़ी होती हैं।


इसके अलावा खिलाड़ी की फैमिली से सम्बंधित या अन्य किसी भी मांग को भी पूरा करना होता है। इतना होने के बाद खिलाड़ियों के एजेंट की फीस को लेकर भी चर्चा करनी होती है और उनकी सैलरी पर अग्रीमेंट बनाना पड़ता है। इतना सब होने के बाद पर्सनल टर्म की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।


4. क्लॉज़ और ट्रांसफर होने की पुष्टि

FBL-FRA-LIGUE1-PSG

पर्सनल टर्म की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खिलाड़ी का ट्रांसफर और भी करीब आ जाता है। मॉडर्न फुटबॉल में खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में रिलीज़ क्लॉज़ दिया जाने लगा है। कॉन्ट्रैक्ट में रिलीज़ क्लॉज़ खिलाड़ी और क्लब दोनों को प्रोटेक्ट करने के लिए डाला जाता है।


अगर खिलाडी अपने करियर के किसी स्टेज में दूसरे क्लब जाने की इच्छा दिखाता है, तो बाइंग क्लब उसका रिलीज़ क्लॉज़ ट्रिगर कर उन्हें साइन कर सकता है। इससे क्लब को भी अच्छी रकम मिल जाती है और खिलाड़ी का भी मूव पूरा हो जाता है। इसके अलावा भी कुछ खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में उनके व्यवहार या अन्य चीज़ों से जुड़े कुछ क्लॉज़ हो सकते हैं।


इसके बाद खिलाड़ी का मेडिकल होता है। जब भी कोई क्लब नए खिलाड़ी को साइन करने के लिए इंवेस्टमेंट करता है, तो उनका लक्ष्य होता है कि वे स्वस्थ खिलाड़ी को क्लब से जोड़ें। मेडिकल का उद्देश्य खिलाड़ी के शरीर में किसी भी कमजोरी या इंजरी को ढूंढ निकालने का होता है। अगर खिलाड़ी मेडिकल में फ़ेल हो जाते हैं तो उनका मूव रुक जाता है।


सफल मेडिकल होने के बाद क्लब को समय पर पेपरवर्क एसोसिएशन को भेजना होता है, अगर यह काम डेडलाइन डे के बाद किया जाता है, तो ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। पेपरवर्क के बाद प्रेस रिलीज़, सोशल मीडिया, क्लब शर्ट में तसवीरें और कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी हो जाती है।


5. कैसे काम करते हैं ट्रांसफर्स?

FBL-ENG-FACUP-LIVERPOOL-EVERTON

एक प्रपोज़्ड ट्रांसफर डील में, तीन नेगोसिएशन सबसे ज़रूरी होते हैं- खरीदने वाले क्लब और मौजूदा क्लब के बीच में ट्रांसफर फीस पर चर्चा, पर्सनल टर्म्स पर खरीदने वाले क्लब और प्लेयर के एजेंट के बीच में बातचीत और खरीदने वाले क्लब और प्लेयर के एजेंट के साथ एजेंट की फीस को लेकर चर्चा।


तकनीकी रूप से खरीदने वाले क्लब को मौजूदा क्लब से खिलाड़ी के पोटेंशियल मूव के बारे में चर्चा करने के लिए अनुमति लेनी होती है, लेकिन हकीकत में ऑफिशियल परमिशन के पहले इंटरमीडिएट्स के जरिये इंट्रेस्टेड क्लब और खिलाड़ी में चर्चा होने लगती है।


यह खतरनाक हो सकता है और इससे क्लब पर टैपिंग-अप के आरोप लग सकता है, जैसा हमने बीते समर  साउथैम्पटन द्वारा वर्जिल वान डाइक के लिवरपूल में ट्रांसफर को लेकर देखा।


6. व्हाट्सऐप का रोल 

FBL-ESP-REALMADRID-RONALDO-SCORER

ट्रांसफर की काफी चर्चाएं व्हाट्सऐप के जरिये होती हैं। काफी एजेंट्स और क्लब एग्जीक्यूटिव व्हाट्सऐप को प्रेफर करते हैं - यह ई-मेल से ज्यादा आसान होता है और इसमें ग्रुप चैट फीचर और रीड रिसीप्ट का ऑप्शन होता है, जिससे ताज़ा जानकारी को दूसरे व्यक्ति द्वारा प्राप्त करने को लेकर कोई चिंता नहीं रहती।


इसके साथ ही व्हाट्सऐप कॉन्टैक्ट की जानकारी भी नहीं बदलती। उदाहरण के लिए किसी हाई प्रोफाइल क्लब एग्जीक्यूटिव ने नए देश में अन्य क्लब के साथ जॉब की शुरुआत की है और अब उनका नया ई-मेल, ऑफिस नम्बर और क्लब का मोबाइल नंबर होता है।


लेकिन उनका व्हाट्सऐप नंबर वही होता है, इससे स्टेकहोल्डर्स आसानी से एग्जीक्यूटिव तक किसी भी डील के लिए पहुंच पाते हैं और उन्हें क्लब की जानकारी नहीं खोदनी पड़ती।


व्हाट्सऐप 2017 में फुटबॉल ट्रांसफर्स के लिए एक बड़ा टूल है।


7. मल्टीपल रीप्रेजेंटेशन अग्रीमेंट क्या होता है? 

Manchester United v Swansea City - Premier League

जब 2016 के समर में रिपोर्ट किया गया कि एजेंट मिनो राइओला ने पॉल पोग्बा के वर्ल्ड रिकॉर्ड ट्रांसफर को लेकर मैनचेस्टर यूनाइटेड, युवेंटस और फ्रेंच मिडफील्डर तीनों की ओर से एक्ट किया था, तो इसे काफी यूनीक सिचुएशन समझा गया था।


बीती समर रोमेलु लुकाकू के मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए साइन करने का एक कारण बताया गया कि ओल्ड ट्रैफर्ड क्लब एजेंट फीस देने को तैयार थी, वहीं चेल्सी ने इसे देने से साफ मना कर दिया था।


हकीकत में एजेंट का मल्टीपल पार्टीज़ के लिए काम करना नॉर्मल है। उदाहरण के लिए लुकाकू के ट्रांसफर में उनके एजेंट राइओला खरीदने वाले क्लब के साथ उनके पर्सनल टर्म को लेकर नेगोशिएट कर रहे होंगे और एवर्टन के साथ ट्रांसफर फीस के नेगोशिएशन में भी वह मैनचेस्टर यूनाइटेड की ओर से एक्ट कर रहे होंगे।


मल्टीपल रीप्रेजेंटेशन अग्रीमेंट काफी कॉमन है और अगर सभी पार्टीज को इससे दिक्कत नहीं है तो यह नियमों के अंदर ही आता है, जब तक खिलाड़ी को एजेंट फीस न देनी पड़े। FA से डबल या ट्रिपल रीप्रेजेंटेशन के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया भी काफी आसान होती है।


8. कुछ क्लब्स ट्रांसफर विंडो के खुलने से पहले डील होने की घोषणा कैसे कर देते हैं? 

FBL-ENG-PR-MAN CITY-SWANSEA

इंटरनेशनल ट्रांसफर्स 1 जुलाई के पहले प्रोसेस नहीं हो सकते। लेकिन फिर भी बरनार्डो सिल्वा के मैनचेस्टर सिटी आने की घोषणा क्लब ने बीते समर 24 मई को कैसे की? 1 जुलाई तक खिलाड़ी को रजिस्टर नहीं किया जा सकता, लेकिन यह बाइंग क्लब, सेलिंग क्लब और खिलाड़ी के बीच अग्रीमेंट को नहीं रोक सकता।


काफी क्लबों के लिए फिस्कल ईयर 1 जुलाई से 30 जून तक होता है, जो समर ट्रांसफर विंडो की शुरुआत के साथ मेल खाता है। इससे क्लब्स के पास ट्रांसफर्स को अपने पुराने और नए फिस्कल ईयर में दर्शाने की स्वतंत्रता होती है।


उदाहरण के लिए बार्सिलोना ने जून 2014 में सेस्क फैब्रेगास का चेल्सी ट्रांसफर पूरा किया, और उस प्रॉफिट को 2013-14 के अकाउंट में दर्शाया। लेकिन फैब्रेगास 1 जुलाई तक चेल्सी के साथ रजिस्टर नहीं कर पाए थे।


ट्रांसफर्स में मार्केटिंग को भी ध्यान में रखा जाता है। चेल्सी की एडिडास के साथ डील 30 जून को खत्म होती थी और नाइकी के साथ 1 जुलाई को उनकी डील की शुरुआत होती थी।


चेल्सी और नाइकी ने 900 मिलियन पौंड का 15 साल का कॉन्ट्रैक्ट अग्रीमेंट किया था, इसलिए चेल्सी के पास डील को 1 जुलाई से पहले अनाउंस करने का कोई लॉजिकल कारण नहीं था। क्लब कुछ दिन रुककर अपने कमर्शियल पार्टनर का फायदा कराने के लिए मार्की साइनिंग की घोषणा करता है। खासकर इसलिए क्योंकि पुराना पार्टनर नए पार्टनर का डायरेक्ट कॉम्पिटिटर होता है।


चेल्सी ने बीती समर एंटोनियो रूडिगर की साइनिंग एक युवा फैन के क्लब शॉप में उनके नाम वाली जर्सी पाने का वीडियो बनाकर की थी, जो दर्शाता है कि कमर्शियल पार्टनर्स का कितना महत्व होता है।


कुछ डील्स को पूरा होने में इसलिए भी समय लगता है क्योंकि ट्रांसफर फीस या पर्सनल टर्म पर अग्रीमेंट की डिटेल्स काफी पेचीदा होती है। वहीं कुछ खिलाड़ी नेशनल टीम के साथ वर्ल्ड कप में हिस्सा लेंगे, ऐसे खिलाड़ी लगातार फुटबॉल खेलने के कारण छुट्टियों पर जाते हैं।


काफी क्लब्स जल्द ही प्री-सीजन ट्रेनिंग की शुरुआत कर देते हैं, जिसके चलते इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले खिलाड़ियों के पास अपने परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताने का ज्यादा वक्त नहीं रहता और ऐसे खिलाड़ियों का ट्रांसफर पूरा समर तक खिंच जाता है। वहीं कुछ खिलाड़ियों के ट्रांसफर्स में देरी वर्क परमिट और इमेज राइट की डील आदि वजहों से भी रूकती हैं।


9. क्या शर्ट सेल्स से क्लब्स ट्रांसफर फीस की भरपाई कर सकते हैं? 

Real Madrid v FC Barcelona - Supercopa de Espana: 2nd Leg

अक्सर ऐसा कहा जाता है कि किसी भी मार्की खिलाड़ी की शर्ट सेल्स से उनकी ट्रांसफर फीस की भरपाई की जा सकती है। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।


किट डील्स ट्रेडिशनल स्पॉनसर डील से अलग होती है। यह लाइसेंसिंग डील होती है जो किट निर्माता क्लब के ब्रांड का नाम अपने परिधानों को बेचने के लिए इस्तेमाल करता है। क्लबों को इसके लिए सालाना आय मिलती है।


उदाहरण के लिए मैनचेस्टर यूनाइटेड को हर साल एडिडास से 75 मिलियन पौंड प्रति ईयर, चेल्सी को नाइकी से 60 मिलियन पौंड प्रति ईयर, आर्सनल को प्यूमा से 30 मिलियन पौंड प्रति ईयर और किट निर्माता द्वारा शर्ट सेल्स से जनेरेट किए गए रेवेन्यू का 10-15% हिस्सा मिलता है।


सामान्य सोच के विपरीत स्टार साइनिंग्स से किट की सेल्स काफी ज्यादा नहीं बढ़ती। नए खिलाड़ियों के आने से शर्ट सेल्स को बढ़ावा जरूर मिलता है, लेकिन मुख्यतः वही फैंस शर्ट खरीदते हैं जो पहले से शर्ट लेने का प्लान किए रहते हैं। ऐसे फैंस पुराने खिलाड़ियों की जगह नई साइनिंग की शर्ट को खरीदना प्रेफर करते हैं।


किट डील किसी भी फुटबॉल क्लब का सबसे आकर्षक स्पॉन्सरशिप डील होती है। किट निर्माता इतना बड़ा इंवेस्टमेंट इसलिए करते हैं क्योंकि इसका रिटर्न काफी ज्यादा होता है। एडिडास के सीईओ ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के साथ 750 मिलियन पौंड की दस साल की डील करते वक्त 1.5 बिलियन पौंड का प्रॉफिट प्रोजेक्ट किया था।


क्लब खुद क्यों नहीं शर्ट बनाते और 100% प्रॉफिट अपने पास रखते? इसका सीधा उत्तर है कि वह फुटबॉल क्लब्स हैं, किट निर्माता नहीं है। उनके पास किट निर्माताओं जैसा ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क नहीं है जिससे वह हर देश में लाखों शर्ट्स को शिप कर पाएं।


फुटबॉल क्लब्स किट निर्माताओं की तुलना में काफी छोटे स्केल पर बिज़नेस करते हैं। उदाहरण के लिए नाइकी ने अपने पिछले तीन महीने में चेल्सी के 112 साल के इतिहास से ज्यादा कमाई की है।


10. लोन डील्स का क्या?

FBL-GER-BUNDESLIGA-BAYERN-MUNICH-RODRIGUEZ

ऐसी धारणा है कि क्लब अपने खिलाड़ियों को उनकी मर्ज़ी के बगैर लोन में भेज सकते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है और सभी लोन डील्स में खिलाड़ी की अग्रीमेंट होना बेहद जरूरी है।


अगर खिलाड़ी लोन में जाना नहीं चाहता तो उसे जबरदस्ती नहीं भेजा का सकता। खिलाड़ी लोन में अपने खुद के डेवलपमेंट के लिए जाता है न ही क्लब की बेहतरी के लिए।


उदाहरण के लिए कोलंबिया के हामेज रोड्रिगेज रियल मैड्रिड में कम गेमटाइम मिलने के कारण अगले साल वर्ल्ड कप के मद्देनजर रेगुलर खेलने के लिए बायर्न से दो साल के लोन में जुड़े। 


11. नेट स्पेंड कितना जरूरी होता है? 

New Barcelona Signing Philippe Coutinho Unveiled

अक्सर किसी क्लब के पावर को दर्शाने के लिए एक ट्रांसफर विंडो में उनके नेट खर्चे की बातें की जाती है। लेकिन कोई भी क्लब नेट खर्चे जैसी चीज़ों को ध्यान में रखकर बिज़नेस नहीं करता।


क्लब का बिज़नेस न सिर्फ ट्रांसफर फीस पर निर्भर करता है बल्कि खिलाड़ियों के वेज का भी इनमें अहम् रोल होता है। खिलाड़ियों के वेज और कंपनसेशन में क्लबों को ट्रांसफर फीस से ज्यादा खर्चा आता है।


अगर किसी खिलाड़ी को क्लब 50 मिलियन पौंड की रकम में साइन करता है और खिलाड़ी पांच साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन करता है तो उसकी ट्रांसफर फीस को खिलाड़ी के लाइफटाइम कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से बांटा जाएगा। यानि कि हर सीजन क्लब को उस खिलाड़ी के लिए 10 मिलियन पौंड का खर्चा आएगा न कि एक सीजन में सीधे 50 मिलियन पौंड का।


उदाहरण के लिए बार्सिलोना ने लिवरपूल से फिलिपे कुटीनियो को 142 मिलियन पौंड की फीस में पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट में साइन किया है, और कैटलन क्लब अपने रिकॉर्ड में हर साल कुटीनियो के लिए 28.3 मिलियन पौंड का खर्च दिखाएगा।


ट्रांसफर फीस के अलावा उनके वेज को भी ध्यान में रखना पड़ेगा जिससे कुटीनियो की असल कॉस्ट पता चलेगी। खिलाड़ी के कीमत में बेसिक वेज, इमेज राइट की डील, साइनिंग ऑन फीस और परफॉरमेंस ऐड ऑन्स जैसी चीज़ें भी जुड़ी होतीं हैं।


कुटीनियो का ओवरऑल कंपनसेशन पैकेज करीब 200,000 पौंड प्रति वीक के आसपास का होगा जो उनके हर साल की ट्रांसफर फीस (£28 मिलियन) में जुड़ेगा। ला लीगा, बार्सिलोना, UEFA सभी कुटीनियो की कॉस्ट को एक साल में 142 मिलियन पौंड की बजाए 41 मिलियन पौंड प्रति साल की फीस के हिसाब से देखेंगे।


इसी कारण जो भी क्लब्स खिलाड़ियों के लिए ट्रांसफर फीस को अपफ्रंट दे पाते हैं उन्हें नेगोसिएशन में फायदा मिलता है। बड़ी ट्रांसफर फीस के लिए रकम को सामान्यतः इंस्टॉलमेंट में दिया जाता है। UEFA के फायनैंशियल फेयर प्लेयर रेगुलेशंस के लिए क्लब्स अपने बजट के हिसाब से प्लेयर की कॉस्ट को इसी तरह कैलकुलेट करते हैं।


12. स्वैप डील्स होना क्यों कम हो गया है?  

FBL-ENG-PR-MAN UTD-ARSENAL

स्वैप डील का प्रचलन अब कम हो गया है। एक खिलाड़ी का ट्रांसफर पहले ही काफी कॉम्प्लेक्स होता है और जब इसमें दूसरे खिलाड़ी के ट्रांसफर को जोड़ा जाता है तो चीज़ें और भी जटिल हो जातीं हैं।


दूसरे खिलाड़ी के आने से एक प्रपोज़्ड ट्रांसफर डील में, नेगोसिएशन की एक और लेयर आ जाती है जिससे कंफ्यूजन काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा दोनों खिलाड़ियों का मूव के लिए ओपन होना भी काफी जरूरी होता है।


13. रिलीज़ क्लॉज़ कैसे काम करते हैं ? 

FBL-ESP-LIGA-GETAFE-ATLETICO

कभी-कभी जब किसी खिलाड़ी, जिसके कॉन्ट्रैक्ट में रिलीज़ क्लॉज़ होता है, और कोई क्लब उस खिलाड़ी के वैल्यूएशन को मैच करता है, उसके बाद भी उस खिलाड़ी का मूव पूरा नहीं हो पाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रिलीज़ क्लॉज़ दो प्रकार के होते हैं: एक्चुअल रिलीज़ क्लॉज़ और गुड फेथ रिलीज़ क्लॉज़।


एक्चुअल रिलीज़ क्लॉज़ में अगर खरीदने वाला क्लब खिलाड़ी के मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के टर्म्स और कंडीशंस को मान लेता है तो मौजूदा क्लब को उस खिलाड़ी को बेचना होता है।


लेकिन खिलाड़ी के कॉन्ट्रैक्ट के टर्म्स को क्लब्स ऐसा स्ट्रक्चर करते हैं जिससे राइवल क्लब्स उसका फायदा न उठा सकें। उदाहरण के लिए कोई भी प्रीमियर लीग क्लब अपने खिलाड़ी के रिलीज़ क्लॉज़ का स्ट्रक्चर ऐसा करेगा जिससे अन्य प्रतिद्वंदी प्रीमियर लीग क्लब उस खिलाड़ी को न खरीद पाएं।


इंटर के माउरो इकार्डी इसके अच्छे उदाहरण हैं। उनका रिलीज़ क्लॉज़ 100 मिलियन यूरोज़ का है, लेकिन उसे केवल नॉन-इटैलियन क्लब्स एक्टिवेट कर सकते हैं। गुड फेथ रिलीज़ क्लॉज़ किसी काम के नहीं होते और इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि मौजूदा क्लब को खिलाड़ी के सेल के लिए इंट्रेस्टेड क्लब के साथ गुड फेथ में नेगोसिएशन के लिए एंटर करना पड़ेगा।


यह आर्टिकल बीते समर हमारी 'ट्रांसफर प्रक्रिया सीरीज़' के आर्टिकल्स का मिश्रण है, जिसे बदलते नियमों और पैटर्न के साथ रिफ्रेश किया गया है।