फुटबॉल दुनिया में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल है। फुटबॉल एक टीम स्पोर्ट है जहां दो टीमें बहुत ही अटैकिंग माइंडसेट व जोश के साथ एक दूसरे के खिलाफ खेलती हैं। टीम में अलग-अलग पोजिशन्स को गोलकीपर, डिफेंडर, मिडफील्डर, स्ट्राइकर (फॉरवर्ड) के नाम से जाना जाता है।


एक टीम के लिए एक बार मैदान पर कुल 11 प्लेयर उतर सकते हैं, तीन प्लेयर्स को मैनेजर सब्सिट्यूट के तौर पर उतार सकता है। इस खेल का मुख्य उद्देश्य अपने विपक्षी टीम के खेमे में ज्यादा से ज्यादा गोल दागना होता है।

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फुटबॉलर्स का रोल और खेल के नियम

1) स्ट्राइकर (फॉरवर्ड): इनका मुख्य काम गोल करना होता है।

2) मिडफील्डर: मिडफील्डर, विपक्षियों से बॉल छीन कर अपने आगे खेलने वाले प्लेयर्स को बॉल देने का काम करता है। साथ ही वह विपक्षी टीम के बन रहे मूव को तोड़ने का काम भी करता है।

3) डिफेंडर: डिफेंडर मुख्य तौर पर अपने विरोधियों को गोल स्कोर करने से रोकता है।

4) गोलकीपर: गोलकीपर अकेला ऐसा खिलाड़ी होता है जिसे बॉल को हाथ से पकड़ने की इजाज़त होती है। हालांकि वह अपने गोल के सामने बॉक्स के अंदर ही ऐसा कर सकता है।

5) मैनेजर: मैनेजर रणनीति बनाने, टीम को कोचिंग देने और ट्रांसफर वगैरह देखने का काम करता है।

6) यह खेल कुल 90 मिनट का होता है जो 45-45 मिनट के दो हिस्सो जिन्हें फर्स्ट और सेकंड हाफ कहते हैं, में बंटा होता है।

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7) किक-ऑफ: खेल के टाइम काउंटिंग की शुरुआत किक मारने के साथ होती है जिसे किक-ऑफ कहते हैं।

8) पेनल्टी एरिया: गोल के सामने का एरिया पेनल्टी एरिया कहलाता है ये एरिया सर्कल लाइन से पहचाना जा सकता है और यह गोलपोस्ट से 16.5 मीटर की दूरी पर होता है।

9) पेनल्टी किक: गोलकीपर या डिफेंस करने वाली टीम अगर बॉक्स के अंदर विपक्षी खिलाड़ी पर खतरनाक फाउल करती है तो सज़ा के तौर पर पेनल्टी दी जा सकती है।

10) पेनल्टी शूटआउट: लीग गेम में निर्धारित 90 मिनट तक स्कोर बराबर रहने पर गेम ड्रॉ के साथ समाप्त होता है लेकिन नॉकआउट मैचों में अगर खेल तय समय तक बराबर रहता है


तो वह 15-15 मिनट के दो हाफ वाले एक्स्ट्रा टाइम में चला जाता है अगर एक्स्ट्रा टाइम के बाद भी स्कोर बराबर रहे तो पेनल्टी शूटआउट का प्रयोग किया जाता है। इसमें दोनों टीम्स तब तक पेनल्टी किक लेती हैं जब तक कोई एक टीम जीत ना जाए।

11) थ्रो इन: जब बॉल पूरी तरह से लाइन पार कर जाती है (गोल के पीछे की लाइन के अलावा मैदान के दोनों तरफ बनी लाइंस) तब जिस टीम का प्लेयर बॉल को बाहर जाने से पहले आखिरी बार छूता है उसके खिलाफ खेल रही टीम को हाथ से उठाकर बॉल अंदर फेंकनी होती है।

12) गोल किक: जब बॉल अटैक के वक्त या फिर साधारण गेम के दौरान ही डिफेंड कर रही टीम के किसी भी प्लेयर से लगे बिना गोल से पीछे चली जाती है तो डिफेंस कर रही टीम के गोलकीपर को गोल किक मिलती है जिसमें उसके द्वारा बॉल को हिट करने से पहले तक दूसरी टीम का प्लेयर बॉल तक नहीं आ सकता।

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13) कॉर्नर किक: जब बॉल डिफेंस कर रही टीम के किसी प्लेयर या गोलकीपर से लगकर बाहर जाए तो अटैकिंग टीम को कॉर्नर से किक लेने का मौका मिलता है जिसे कॉर्नर किक कहते हैं।

14) ड्रॉप बॉल: जब रेफरी किसी दूसरी वजह से खेल रोक दे जैसे प्लेयर को गंभीर चोट लगना या बॉल का खराब हो जाना। तब रेफरी दोनों टीमों के एक-एक प्लेयर को साथ लेकर उनके बीच में बॉल गिराकर गेम शुरू करता है।

15) येलो कार्ड: रेफरी द्वारा फाउल किए जाने पर फाउल करने वाले खिलाड़ी को चेतावनी स्वरूप येलो कार्ड दिखाता है।

16) रेड कार्ड: एक ही खेल में दूसरी बार पीला कार्ड मिलने का मतलब है रेड कार्ड का मिलना और इसके बाद उस प्लेयर को मैदान से बाहर जाना होगा और उसे कम से कम अगले एक मैच से बाहर बैठना होगा। रेफरी गंभीर फाउल पर डायरेक्ट रेड कार्ड भी दिखा सकता है।

17) ऑफसाइड: इस नियम के अंतर्गत अटैक कर रही टीम के प्लेयर डिफेंड कर रही टीम के आखिरी डिफेंडर को तब तक पार नहीं कर सकते जब तक कि उनके पास बॉल ना हो।